सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। जालंधर
18 दिन के सीजफायर के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिका ने कार्रवाई करते हुए ईरान की 7 नावों को डुबोने का दावा किया है।
इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह में एक पेट्रोलियम प्लांट पर ड्रोन हमला कर दिया। इस हमले से इंडस्ट्रियल एरिया में भीषण आग लग गई। घटना में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबर है, जिससे भारत की चिंता भी बढ़ गई है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान की ओर जा रही दो नागरिक नौकाओं को निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि ये नावें आईआरजीसी की नहीं थीं, बल्कि आम मालवाहक नौकाएं थीं। इस हमले में 5 नागरिकों की मौत होने की बात कही जा रही है।
इस पूरे विवाद की जड़ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ता गतिरोध है। अमेरिका ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नाकेबंदी कर रखी है, जिससे ईरान के जहाज बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। इसका सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में “प्रोजेक्ट फ्रीडम” पहल शुरू की है, जिसके तहत वहां फंसे विदेशी जहाजों को सुरक्षित निकालने का वादा किया गया है। हालांकि हालात तब और बिगड़ गए जब ईरान ने होर्मुज में एक दक्षिण कोरियाई जहाज पर हमला कर दिया, जिससे उसमें आग लग गई। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं।



