सेंटर न्यूज़ एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
मध्य-पूर्व में शांति की कोशिशें एक बार फिर कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। 17 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बावजूद इज़रायल और लेबनान के बीच हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। सीमा के दोनों ओर लगातार धमाकों और हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
एयरस्ट्राइक से दहला दक्षिणी लेबनान
दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में ताजा हमलों के बाद राहत और बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटे हैं। इन घटनाओं में बच्चों सहित कई लोगों की जान गई है, जिससे स्थानीय आबादी गहरे सदमे में है।
जवाबी हमलों से बढ़ी टकराव की तीव्रता
इजरायली कार्रवाई के बाद हिज़्बुल्लाह ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। उत्तरी इज़रायल की ओर रॉकेट और ड्रोन दागे गए, जिसके चलते सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। कुछ हमलों में सैनिकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
गांव खाली करने की चेतावनी, लोगों में दहशत
इजरायली सेना ने सीमा के पास बसे कई गांवों को खाली करने की चेतावनी जारी की है। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
शांति समझौते पर उठे गंभीर सवाल
लगातार हो रहे हमले यह संकेत दे रहे हैं कि युद्धविराम का असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा। दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।
पूरे क्षेत्र पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल, सीमा पर तनाव चरम पर है और शांति की उम्मीदें कमजोर पड़ती जा रही हैं।



