भगवान शिव के पवित्र धाम कैलाश मानसरोवर की यात्रा को लेकर केंद्र सरकार ने नई तैयारियां शुरू कर दी हैं। साल 2026 के लिए इस कठिन लेकिन आध्यात्मिक यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है, साथ ही इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन आवेदन भी खुल गए हैं।
तीन महीने चलेगा यात्रा अभियान
इस बार यात्रा का आयोजन जून से अगस्त के बीच किया जाएगा। करीब 1,000 श्रद्धालुओं को अलग-अलग जत्थों में भेजा जाएगा। हर बैच में सीमित संख्या में यात्रियों को शामिल किया जाएगा, ताकि यात्रा सुचारु और सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके।
दो अलग-अलग रास्तों से पहुंचेंगे श्रद्धालु
यात्रा के लिए दो प्रमुख मार्ग तय किए गए हैं। पहला रास्ता उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा से होकर गुजरता है, जबकि दूसरा रास्ता सिक्किम के नाथू ला दर्रा के जरिए तय किया जाएगा। दोनों मार्गों से बराबर संख्या में जत्थे रवाना होंगे।
डिजिटल सिस्टम से होगा चयन
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आवेदन से लेकर चयन तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होगी। यात्रियों का चयन कंप्यूटर आधारित लॉटरी सिस्टम से किया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की पक्षपात की संभावना खत्म हो जाती है।
भारत-चीन समन्वय से होगी व्यवस्था
यह यात्रा भारत और चीन के सहयोग से आयोजित होती है। दोनों देशों के बीच समन्वय के जरिए तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, आवागमन और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं।
कठिन राह, लेकिन आस्था अडिग
ऊंचे पहाड़ों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होने की इच्छा रखते हैं। कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन को हिंदू धर्म में बेहद पुण्यदायी माना जाता है, यही कारण है कि सीमित सीटों के बावजूद इसमें भारी उत्साह देखने को मिलता है।



