सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
हिमाचल Pradesh में होने जा रहे नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पहाड़ी राज्य के कई शहरों में चुनावी माहौल पूरी तरह रंग पकड़ चुका है और राजनीतिक दल प्रचार अभियान में जुट गए हैं। इस बार मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं माना जा रहा, बल्कि बड़ी संख्या में मैदान में उतरे निर्दलीय और नाराज नेताओं ने चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। शहरी वोटरों को साधने के लिए पार्टियां विकास, सफाई व्यवस्था, पानी, ट्रैफिक और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही हैं।
17 मई को मतदान, कई शहरों की सियासत दांव पर
राज्य के नगर निगमों और शहरी निकायों में 17 मई को मतदान प्रस्तावित है। धर्मशाला, मंडी, सोलन, पालमपुर, हमीरपुर, ऊना और बद्दी समेत कई महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासन ने मतदान को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं और संवेदनशील बूथों की निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की योजना बनाई जा रही है।
पहली बार चर्चा में आया बद्दी नगर निगम
औद्योगिक क्षेत्र बद्दी इस बार चुनावी चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। नगर निगम बनने के बाद यहां पहली बार चुनाव कराए जा रहे हैं। उद्योगों के बढ़ते दबाव, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी यहां के सबसे बड़े चुनावी मुद्दे माने जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से टैक्स तो बढ़ते रहे लेकिन सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
टिकट बंटवारे के बाद कई जगह बगावत
दोनों प्रमुख दलों में टिकट वितरण के बाद असंतोष भी खुलकर सामने आया है। कई नेताओं ने पार्टी लाइन से अलग जाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनावों में स्थानीय पहचान और व्यक्तिगत पकड़ काफी असर डालती है, इसलिए बागी उम्मीदवार कई वार्डों में खेल बिगाड़ सकते हैं।
युवाओं और महिलाओं पर पार्टियों का फोकस
इस बार चुनाव प्रचार में युवा मतदाता और महिला वोट बैंक सबसे अहम माना जा रहा है। पार्टियां सोशल मीडिया प्रचार, डोर-टू-डोर कैंपेन और छोटे जनसभाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। महिलाओं के लिए सुरक्षा, साफ-सफाई और पानी की उपलब्धता जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया जा रहा है।
नगर निकायों की हालत भी बनी चुनावी मुद्दा
कई शहरों में कूड़े के ढेर, टूटी सड़कें, अवैध पार्किंग और सीवरेज की समस्याओं को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। विपक्षी दल सत्ताधारी पक्ष को नगर निकायों की खराब व्यवस्था के लिए घेर रहे हैं। वहीं सत्ताधारी नेता विकास कार्यों और नई योजनाओं को अपनी उपलब्धि बताकर वोट मांग रहे हैं।
छोटे शहरों में निर्दलीयों का बढ़ रहा असर
हिमाचल के छोटे शहरों और कस्बों में इस बार निर्दलीय उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी दिखाई दे रही है। कई वार्डों में स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय चेहरे चुनाव मैदान में उतर आए हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यही निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव नतीजों में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।
सुरक्षा और निष्पक्ष मतदान पर प्रशासन सख्त
चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में CCTV निगरानी बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा शराब वितरण, पैसे बांटने और आचार संहिता उल्लंघन पर भी प्रशासन की विशेष नजर रहेगी।
विधानसभा चुनाव से पहले माना जा रहा सेमीफाइनल
राजनीतिक विशेषज्ञ इन निकाय चुनावों को आने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल मान रहे हैं। माना जा रहा है कि शहरी क्षेत्रों में जो पार्टी बढ़त बनाएगी, उसे भविष्य की राजनीति में बड़ा मनोवैज्ञानिक फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दलों ने अपने वरिष्ठ नेताओं को भी चुनावी मैदान में उतार दिया है।



