सेंटर न्यूज़ एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
यह जानकारी बिल्कुल सटीक है। आज (24 अप्रैल 2026) आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका सामने आया है। पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने बगावत करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय की घोषणा की है।
इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य तथ्य और अपडेट्स नीचे दिए गए हैं:
पार्टी छोड़ने वाले 7 राज्यसभा सांसद
राघव चड्ढा के नेतृत्व में जिन सांसदों ने AAP का साथ छोड़ा है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- राघव चड्ढा
- स्वाति मालीवाल
- हरभजन सिंह
- संदीप पाठक
- अशोक मित्तल
- राजिंदर गुप्ता
- विक्रम साहनी
बगावत का मुख्य कारण और राघव चड्ढा का बयान
राज्यसभा में AAP के पूर्व उपनेता राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस टूट की आधिकारिक पुष्टि की। उनके मुख्य बयान:
- सिद्धांतों से भटकाव: चड्ढा ने कहा, “आम आदमी पार्टी, जिसे मैंने अपना खून-पसीना दिया और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है। यह पार्टी अब देशहित में नहीं, बल्कि निजी स्वार्थ के लिए काम कर रही है।”
- ‘गलत पार्टी में सही आदमी’: उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “कई लोग मुझसे पिछले कुछ सालों से यह कह रहे थे, और मुझे भी व्यक्तिगत रूप से यह महसूस होने लगा था कि मैं ‘गलत पार्टी में सही आदमी’ हूं।”
- नेतृत्व पर आरोप: उन्होंने बिना नाम लिए शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि वह “उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।”
संवैधानिक प्रावधान (2/3 बहुमत का नियम)
चूंकि AAP के राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं, इसलिए दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए पार्टी को तोड़ने या किसी अन्य पार्टी में विलय के लिए दो-तिहाई (2/3) यानी कम से कम 7 सांसदों की आवश्यकता थी।
राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इसी संवैधानिक प्रावधान का उपयोग करते हुए राज्यसभा के सभापति को अपने हस्ताक्षरित पत्र और आवश्यक दस्तावेज सौंप दिए हैं, जिससे उनकी सदस्यता रद्द हुए बिना वे आधिकारिक तौर पर भाजपा का हिस्सा बन सकें।
यह राजनीतिक फेरबदल अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर, विशेषकर उच्च सदन (राज्यसभा) में, अब तक का सबसे बड़ा और गंभीर संकट है।



