सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
पंजाब और चंडीगढ़ में शुक्रवार को दो अलग-अलग घटनाओं ने चर्चा तेज कर दी। एक तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब सरकार के मंत्री Sanjeev Arora और उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क करने की जानकारी दी, वहीं दूसरी ओर लुधियाना के एक टोल प्लाजा पर कर्मचारी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हो गई।
55.57 करोड़ की संपत्तियों पर ED की कार्रवाई
ED के मुताबिक जांच के दौरान करीब 55.57 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। इनमें बैंक खाते, एफडी, जमीन, व्यावसायिक परिसंपत्तियां और आवासीय संपत्तियां शामिल बताई गई हैं। एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई धनशोधन निवारण कानून (PMLA) के तहत की गई है।
जांच का फोकस कारोबारी लेन-देन और कथित वित्तीय अनियमितताएं
जांच एजेंसी के अनुसार मामला कथित वित्तीय गड़बड़ियों और कारोबारी लेन-देन से जुड़ा है। जांच में कुछ कंपनियों के माध्यम से हुए मोबाइल कारोबार और निर्यात से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी। वहीं संबंधित पक्ष पहले भी आरोपों से इनकार करता रहा है।
पहले गिरफ्तारी, अब संपत्तियों तक पहुंची कार्रवाई
यह मामला पहले से चर्चा में था और इसी जांच के तहत मंत्री संजीव अरोड़ा को मई में गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में मामला न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
लुधियाना टोल प्लाजा पर हंगामे का वीडियो चर्चा में
उधर लुधियाना क्षेत्र के एक टोल प्लाजा पर कर्मचारी के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर घटना की जांच और कार्रवाई की मांग उठ रही है। संबंधित पक्षों की ओर से तथ्य जुटाने का काम जारी बताया जा रहा है।
प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई पर बढ़ी चर्चा
दोनों घटनाओं के सामने आने के बाद पंजाब में प्रशासनिक कार्रवाई, जवाबदेही और व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इन मामलों में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।



