नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की जांच में एक बड़ा दावा सामने आया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान और सत्यापन के दौरान 989 ऐसे प्रतिभागियों का पता चला है, जिनके खिलाफ पहले से विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस दावे के बाद पूरे मामले की जांच और तेज कर दी गई है।
डिजिटल तकनीक से हुई पहचान प्रक्रिया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन स्थल के सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। इसके बाद प्रतिभागियों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड खंगाला गया। इसी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया, जिनका आपराधिक इतिहास रहा है।
कई गंभीर मामलों से जुड़े होने का दावा
जांच में जिन लोगों की पहचान हुई है, उनमें हत्या, लूट, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध और अन्य गंभीर धाराओं में नामजद रहे आरोपी भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है और केवल रिकॉर्ड मिलने के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जा रहा।
प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम की भी हो रही जांच
दिल्ली पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही है। इसके लिए वीडियो फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र कर विश्लेषण किया जा रहा है।
दावे पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
पुलिस के दावों के बाद प्रदर्शन से जुड़े संगठनों और विपक्षी नेताओं ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड होना यह साबित नहीं करता कि उसने प्रदर्शन के दौरान कोई गैरकानूनी गतिविधि की। उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
सभी पहलुओं की जांच के बाद होगी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कदम केवल जांच में उसकी वास्तविक भूमिका स्पष्ट होने के बाद ही उठाया जाएगा।



