सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
जालंधर। बस्ती पीरदाद रोड पर वीरवार सुबह एक औद्योगिक इकाई में आग लगने के बाद आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। गद्दे तैयार करने वाली फैक्ट्री में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही समय में पूरा परिसर धुएं और लपटों से घिर गया। घटना के वक्त अंदर करीब 30 कर्मचारी मौजूद थे, जिन्होंने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। हादसे में एक व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

अचानक बढ़ता गया धुएं का गुबार
सुबह के समय फैक्ट्री में काम चल रहा था। इसी दौरान परिसर के भीतर से धुआं निकलना शुरू हुआ। कुछ ही देर में धुएं की मात्रा इतनी बढ़ गई कि आसपास के लोगों का ध्यान भी घटना की ओर चला गया। कर्मचारियों को जब आग फैलने का अंदेशा हुआ तो उन्होंने बिना समय गंवाए परिसर खाली करना शुरू कर दिया।
फैक्ट्री से बाहर निकलने के बाद कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। अगर आग लगने के बाद सभी लोग समय पर बाहर नहीं आते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

ज्वलनशील सामग्री ने बढ़ाई चुनौती
गद्दा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और केमिकल फैक्ट्री के अंदर मौजूद थे। आग की चपेट में आने के बाद इन चीजों के कारण लपटें तेजी से फैलती चली गईं। बढ़ते तापमान से बिल्डिंग का ढांचा भी प्रभावित हुआ और फैक्ट्री का शेड/लैंटर एक हिस्से से गिर गया।
ढांचा गिरने के बाद अंदर मलबा फैल गया, जिससे दमकल कर्मियों को आग के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने में मुश्किल आई। फायर ब्रिगेड को मलबे के बीच से रास्ता बनाकर अभियान चलाना पड़ा।

दमकल विभाग ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। एडीएफओ मनिंदर सिंह के अनुसार, विभाग को करीब 9:15 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। इसके बाद 8 से 10 फायर टेंडरों को ऑपरेशन में लगाया गया।
दमकल कर्मियों ने अलग-अलग स्थानों से पानी डालकर आग को नियंत्रित करने का प्रयास किया। लगातार कार्रवाई के बाद आग के करीब 95 प्रतिशत हिस्से पर काबू पा लिया गया। टीमों की प्राथमिकता आग को आसपास की इमारतों तक पहुंचने से रोकना रही।

बचाव अभियान के दौरान व्यक्ति हुआ चोटिल
आग बुझाने की कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति का पैर फिसल गया और वह गिरकर घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में करीब 30 कर्मचारियों के सुरक्षित बाहर निकलने के कारण बड़ा जानी नुकसान होने से बच गया।
आग का कारण अभी स्पष्ट नहीं
फैक्ट्री में आग की शुरुआत किस जगह से हुई, इसकी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट की संभावना बताई जा रही है, लेकिन इसे आग का अंतिम कारण नहीं माना गया है। घटना की जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी।
सिलेंडरों को लेकर स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों ने फैक्ट्री में रखे सामान को लेकर चिंता जाहिर की। स्थानीय निवासी केशव के अनुसार, परिसर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी मौजूद थे। लोगों का कहना है कि आग यदि सिलेंडरों तक पहुंचती तो आसपास के रिहायशी क्षेत्र में बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।
इसी वजह से स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की कि ऐसी यूनिटों में ज्वलनशील सामग्री और गैस सिलेंडरों के भंडारण की जांच की जाए तथा सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
पुरानी घटना का भी लोगों ने किया जिक्र
स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि इस स्थान पर करीब 10 वर्ष पहले भी आग लग चुकी है। लोगों के मुताबिक, उस घटना के बाद यूनिट को यहां से हटाने और परिसर का इस्तेमाल केवल गोदाम के रूप में करने की बात कही गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाद में यहां फिर से गद्दा निर्माण का काम होने लगा।
रिहायशी क्षेत्र में फैक्ट्री संचालन पर उठे सवाल
आग की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने रिहायशी क्षेत्र के बीच इस तरह की गतिविधि को लेकर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जहां बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामान और केमिकल का इस्तेमाल होता है, वहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद मजबूत होनी चाहिए।
लोगों ने प्रशासन से मांग की कि इलाके में चल रही औद्योगिक इकाइयों की फायर सेफ्टी, लाइसेंस, निर्माण गतिविधियों और ज्वलनशील सामग्री के भंडारण की जांच कराई जाए।
पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी नाराजगी
स्थानीय लोगों ने पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि घटना के बाद करीब एक घंटे तक पुलिस की मौजूदगी को लेकर सवाल बने रहे। साथ ही लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन के मौके पर नहीं होने पर भी नाराजगी जताई।
फिलहाल दमकल विभाग ने आग के अधिकांश हिस्से को नियंत्रित कर लिया है। अब जांच के बाद आग की वास्तविक वजह और फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।



