सरपंच जसवीर सिंह राणा के विरोध में पटाखा एसोसिएशनें उतरेंगी सड़क पर, प्रदर्शन के बाद शहर की व्यापारिक यूनियनों से करेंगे बैठक; जमीन का किराया, फसल मुआवजा और दुकानों की तैयारी पर खर्च किए पैसे फंसने की आशंका
सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
जालंधर। दिवाली से पहले पटाखा बाजार लगाने को लेकर जालंधर में विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। गांव राऊवाली में प्रस्तावित पटाखा मार्केट को लेकर अदालत की रोक के बाद कारोबारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। सोमवार, 26 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे श्री राम चौक (कंपनी बाग) में पटाखा एसोसिएशनों से जुड़े कारोबारी धरना देकर अपना विरोध दर्ज करवाएंगे। इस दौरान गांव राऊवाली के सरपंच जसवीर सिंह राणा के खिलाफ विरोध जताने के साथ आम लोगों को भी पूरे विवाद की जानकारी देने की योजना है।
विकास भंडारी, रवि महाजन, संजीव बाहरी और धीरज कुमार की ओर से जारी सूचना में सभी पटाखा एसोसिएशनों के सदस्यों को धरने में शामिल होने की अपील की गई है। कारोबारियों ने इसके बाद जालंधर की विभिन्न व्यापारिक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का भी कार्यक्रम बनाया है। इस बैठक में विवाद के समाधान और आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा की जाएगी।
अदालत की रोक से अटका बाजार लगाने का मामला
राऊवाली में पटाखा बाजार लगाने की तैयारी के बीच मामला अदालत पहुंच गया। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 23 अक्टूबर को सिविल जज जूनियर डिवीजन गुरप्रीत सिंह की अदालत ने संबंधित जमीन पर पटाखा मार्केट स्थापित करने और चलाने पर अंतरिम रोक लगाई थी। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है।
पटाखा मार्केट को बल्टन पार्क के बजाय पठानकोट रोड स्थित राऊवाली में लगभग 5.5 एकड़ जमीन पर लगाने की योजना थी। स्टेडियम निर्माण के चलते पुराने स्थान पर बाजार लगाने में परेशानी आने के बाद नई जगह तलाश की गई थी। लेकिन जमीन को लेकर विरोध और कानूनी कार्रवाई के कारण बाजार का आयोजन अनिश्चितता में पड़ गया।
अदालत के आदेश की अंतिम शर्तों के अनुसार ही तय होगा कि जमीन पर किस तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं और बाजार लगाने के लिए किन परिस्थितियों में अनुमति मिल सकती है। कारोबारियों को फिलहाल आदेश का पालन करना होगा। केवल प्रशासनिक अनुमति या आपसी समझौते के आधार पर अदालत की रोक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कारोबारियों का दावा- किराया दिया, फसल का मुआवजा भी भरा
पटाखा कारोबारियों का कहना है कि बाजार लगाने के लिए जमीन किराए पर ली गई थी और जमीन मालिक को भुगतान किया गया था। जमीन पर खड़ी फसल के नुकसान की भरपाई के लिए किसान को मुआवजा देने की बात भी कारोबारियों की ओर से कही गई है। उनका पक्ष है कि जमीन और बाजार की तैयारियों में खर्च करने के बाद अब कानूनी अड़चन के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कारोबारियों ने यह भी कहा है कि पंचायत के साथ उनका कोई आर्थिक लेनदेन नहीं हुआ। उनका दावा है कि सरपंच या पंचों को कोई पैसा नहीं दिया गया और न ही पंचायत की ओर से उनसे पैसे मांगे गए। इस संबंध में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि विवाद के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके।
मार्केट नहीं लगी तो दिवाली की कमाई पर पड़ेगा असर
पटाखा कारोबारियों के लिए दिवाली साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय होता है। यदि समय पर बाजार नहीं लग पाता, तो उन्हें कई तरह के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। जमीन के किराए और फसल के मुआवजे पर खर्च की गई रकम के अलावा अस्थायी दुकानों, शेड, बिजली और अन्य व्यवस्थाओं पर किया गया खर्च भी फंस सकता है।
यदि कारोबारियों ने पहले से पटाखों का स्टॉक खरीद रखा है, तो बिक्री में देरी से माल के भंडारण और परिवहन का खर्च बढ़ सकता है। दिवाली के सीमित बिक्री सीजन में बाजार देर से खुलने पर ग्राहकों की संख्या और कारोबार दोनों प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, कुल कितनी रकम दांव पर लगी है और कारोबारियों को वास्तविक नुकसान कितना हो सकता है, इसका सत्यापित आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है।
वैकल्पिक स्थान पर बाजार लगाने की संभावना भी संबंधित लाइसेंस, सुरक्षा नियमों, प्रशासनिक मंजूरी और अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी। इसलिए बाजार नहीं लगने की स्थिति में सभी कारोबारियों का पैसा पूरी तरह डूब जाएगा, ऐसा अभी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता।
व्यापारिक संगठनों का समर्थन जुटाने की तैयारी
सोमवार को होने वाले धरने के बाद व्यापारिक यूनियनों के साथ बैठक इस विवाद में अगला महत्वपूर्ण कदम होगी। कारोबारी चाहते हैं कि उनकी समस्याओं को प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाए तथा ऐसा समाधान निकले जिससे नियमों के तहत पटाखा बाजार लगाने का रास्ता निकल सके।
अब कारोबारियों की नजर 29 अक्टूबर को होने वाली अदालत की सुनवाई पर रहेगी। अदालत से राहत मिलने, वैकल्पिक जगह उपलब्ध होने या प्रशासन की ओर से कोई नया निर्णय लिए जाने पर ही बाजार की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। तब तक राऊवाली पटाखा मार्केट को लेकर कारोबारियों और गांव की पंचायत के बीच विवाद के और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।



