होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ा सुरक्षा संकट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल; दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी दुनिया की नजर
सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
जालंधर, 3 नवंबर। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की नई घटना सामने आई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर सीमित सैन्य कार्रवाई की है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। खास बात यह है कि हमला ऐसे इलाके के नजदीक हुआ है, जहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की बड़ी खेप का परिवहन होता है।
रणनीतिक क्षेत्र में हुई अमेरिकी कार्रवाई
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने क़ेश्म द्वीप पर की गई कार्रवाई की पुष्टि की है। अमेरिकी पक्ष ने इसे अपनी सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ा रक्षात्मक कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य संसाधनों को संभावित खतरा होने के मद्देनजर यह कार्रवाई की गई। हालांकि, अमेरिका ने इसे बड़े पैमाने पर नए सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं बताया है।
ईरान की ओर से धमाकों की सूचना
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने क़ेश्म द्वीप पर धमाकों की खबर दी थी। यह द्वीप फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य और समुद्री गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। अभी तक हमले में हुए नुकसान और संभावित जनहानि को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद नहीं थम रहा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद को समाप्त करने के लिए अलग-अलग स्तर पर बातचीत की कोशिशें की जा रही हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कतर के माध्यम से दोनों देशों के बीच संपर्क और तनाव कम करने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच स्थायी सहमति नहीं बन सकी है। ताजा सैन्य कार्रवाई ने बातचीत की संभावनाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम क्षेत्र बनकर उभरा है। दुनिया के कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों से कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। यहां जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर तेल आयात करने वाले देशों की भी नजर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा हुआ कच्चा तेल
सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। रॉयटर्स के अनुसार, एशियाई कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 0.5 प्रतिशत बढ़कर 105.25 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत भी बढ़कर 96.93 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। बाजार में इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने और समुद्री परिवहन प्रभावित होने की स्थिति में आयात लागत पर दबाव आ सकता है। इसका असर आगे चलकर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और परिवहन लागत पर भी पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल किसी निश्चित घरेलू मूल्य वृद्धि की घोषणा नहीं हुई है।
अब ईरान के रुख पर टिकी नजर
अमेरिकी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है। यदि दोनों देशों के बीच जवाबी सैन्य कदमों का सिलसिला आगे बढ़ता है तो क्षेत्र में तनाव और गहरा सकता है। फिलहाल हमले के नुकसान, ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कूटनीतिक बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।



