CENTRE NEWS EXPRESS (19 DECEMBER DESRAJ)
सूफी इस्लामिक बोर्ड के वाइस प्रेसिडेंट (नॉर्थ), डॉ. सूफी राज जैन ने माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा “सर तन से जुदा” जैसे उग्र और हिंसक नारे के विरुद्ध दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का खुले दिल से स्वागत किया है।
डॉ. सूफी राज जैन ने अपने बयान में कहा कि सूफी इस्लामिक बोर्ड पिछले कई वर्षों से इस नारे का निरंतर और सशक्त विरोध करता रहा है, क्योंकि यह नारा न तो इस्लाम की शिक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है और न ही मानवता, शांति और संविधान के मूल्यों के अनुरूप है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सोच भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने आगे कहा कि सूफी इस्लामिक बोर्ड ने समय-समय पर ऐसे उकसाने वाले और हिंसा भड़काने वाले नारे लगाने वाले संगठनों पर भारत में प्रतिबंध लगाने की सिफारिश केंद्र और राज्य सरकारों से की है। बोर्ड का स्पष्ट मत है कि धर्म के नाम पर हिंसा और धमकी की राजनीति किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
डॉ. सूफी राज जैन ने कहा,
“माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय लोकतंत्र, संविधान और कानून के शासन को मजबूत करता है। भारत में न्याय व्यवस्था ही अंतिम है, किसी व्यक्ति या भीड़ को सजा देने का अधिकार नहीं है। सूफी परंपरा प्रेम, करुणा, संवाद और इंसानियत का संदेश देती है, न कि नफरत और हिंसा का।”
अंत में उन्होंने प्रशासन और समाज से अपील की कि कट्टरता और उग्र विचारधाराओं के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना समय की आवश्यकता है, ताकि देश में शांति, भाईचारा और सर्वधर्म समभाव बना रहे।



