सेंटर न्यूज़ एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर सत्ता के महासंग्राम का अंतिम चरण संपन्न होते ही अब सबकी नजरें नतीजों पर टिक गई हैं। इस बार बंगाल के मतदाताओं ने जिस तरह से भारी संख्या में घर से बाहर निकलकर मतदान किया, उसने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। राज्य में कुल 92.93% मतदान होना इस बात का प्रमाण है कि जनता इस बार किसी बड़े बदलाव या फिर अपनी पुरानी पसंद को और मजबूती देने के पक्ष में है।
भारी मतदान और लोकतंत्र की गूंज
बंगाल के इस चुनाव में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। चुनाव आयोग के अनुसार, पूर्व बर्धमान जैसे जिलों ने सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज कर इतिहास रच दिया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस चुनाव का सबसे बड़ा आकर्षण रही। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वोटिंग अमूमन सत्ता विरोधी लहर या फिर किसी विशेष योजना के प्रति भारी समर्थन का संकेत होती है।
एग्जिट पोल: किसकी बनेगी सरकार?
मतदान खत्म होते ही जारी हुए विभिन्न सर्वेक्षणों (एग्जिट पोल) ने राज्य का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। पी-मार्क और चाणक्य जैसी एजेंसियों ने भाजपा को 150 से अधिक सीटें देकर बंगाल में पहली बार भगवा लहराने का अनुमान जताया है। वहीं, पीपल्स पल्स ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को 180 के करीब सीटें दी हैं। अधिकांश सर्वेक्षण यह दिखा रहे हैं कि मुकाबला बेहद कड़ा है और जीत का अंतर बहुत कम रहने वाला है।
सत्ता की चाबी किसके हाथ?
इस चुनाव में भ्रष्टाचार, आरजी कर अस्पताल मामला और ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं मुख्य केंद्र में रहीं। जहां भाजपा ने ‘बदलाव’ का नारा दिया, वहीं तृणमूल ने ‘बंगाल की बेटी’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। अब 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना ही यह तय करेगी कि बंगाल की जनता ने ममता बनर्जी के विकास कार्यों पर मुहर लगाई है या भाजपा के ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प को चुना है। फिलहाल, राज्य में शांति बनी हुई है और दोनों खेमे अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।



