सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
देशभर में कई ऐसे छात्र सामने आए हैं जिन्होंने जेईई मेन और एडवांस्ड में बेहतरीन रैंक हासिल की, लेकिन 12वीं बोर्ड परीक्षा में निर्धारित अंकों की शर्त पूरी न होने से उनके लिए प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश मुश्किल हो गया है। मौजूदा नियमों के तहत सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और अन्य केंद्रीय तकनीकी संस्थानों में दाखिले के लिए 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत अंक या अपने बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में शामिल होना जरूरी है।
बोर्ड परीक्षा के नतीजे आने के बाद कई छात्रों ने दावा किया कि उनकी प्रवेश परीक्षा में उपलब्धि और बोर्ड के अंक एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। इसके कारण अनेक अभ्यर्थी अब सुधार परीक्षा और अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जेईई में सफलता मिलने के बाद भी बोर्ड परीक्षा की पात्रता शर्त पूरी करना अनिवार्य है। ऐसे विद्यार्थी जो निर्धारित प्रतिशत से पीछे रह गए हैं, वे इम्प्रूवमेंट एग्जाम देकर अपने अंक बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ निजी और राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए अलग पात्रता नियम लागू होते हैं।
वहीं छात्रों और अभिभावकों के बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि प्रवेश परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बोर्ड अंकों की अनिवार्यता को लेकर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया में 75 प्रतिशत अंक या टॉप-20 पर्सेंटाइल का नियम लागू है और उसी के आधार पर दाखिले दिए जा रहे हैं।



