सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड परीक्षाओं में अपेक्षा से कम परिणाम देने वाले 68 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित स्कूल प्रमुखों को यह बताना होगा कि उनके संस्थानों का परीक्षा परिणाम कमजोर क्यों रहा और भविष्य में इसे सुधारने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाएगी।
कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों की हुई समीक्षा
बोर्ड परीक्षा के नतीजों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद शिक्षा विभाग ने उन स्कूलों की पहचान की, जहां विद्यार्थियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। विभाग का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल स्तर पर जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
प्रिंसिपलों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
नोटिस प्राप्त करने वाले प्रिंसिपलों को निर्धारित समय के भीतर लिखित जवाब देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट में कमजोर परिणामों के कारण, स्कूल स्तर पर आई चुनौतियां और आगामी सत्र में परीक्षा परिणाम सुधारने की कार्ययोजना का उल्लेख करना होगा।
सुधार के लिए तैयार होगी नई रणनीति
शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि केवल जवाब लेना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों के लिए विशेष सुधार योजना भी तैयार की जाएगी। विद्यार्थियों की नियमित शैक्षणिक निगरानी, अतिरिक्त कक्षाएं, शिक्षकों की जवाबदेही और अभिभावकों से बेहतर समन्वय जैसे उपायों पर जोर दिया जाएगा।
लापरवाही पर हो सकती है कार्रवाई
विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी स्कूल प्रमुख का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या भविष्य में भी प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
शिक्षा स्तर सुधारने पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना और बोर्ड परीक्षाओं में सफलता का स्तर बढ़ाना है। इसी दिशा में शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों के प्रदर्शन की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठा रहा है।



