सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
एक MBA छात्रा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि कोई भी बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार जीवनसाथी चुनने का अधिकार रखता है और इस फैसले में जबरन हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता।
याचिका में क्या कहा गया
युवती ने अदालत को बताया कि उस पर परिवार की तरफ से विवाह को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। उसने अपनी सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के अधिकार की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने अधिकारों को बताया संवैधानिक संरक्षण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी पसंद से विवाह करना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और निजी स्वतंत्रता का हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग होने के बाद व्यक्ति अपने जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने का अधिकार रखता है।
सुरक्षा देने के निर्देश जारी
मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों को युवती की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई कदम न उठाया जाए।
व्यक्तिगत फैसलों में अनावश्यक दखल पर टिप्पणी
कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज और परिवार को बालिग व्यक्तियों के निजी निर्णयों का सम्मान करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कानून के दायरे में रहकर फैसला ले रहा है तो उस पर दबाव बनाना उचित नहीं माना जा सकता।



