सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को E20 ईंधन नीति को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा हुई। इसके साथ ही कर्मचारियों के डीए, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, बंदी सिखों की रिहाई, अधूरी परियोजनाएं, बाढ़ सुरक्षा, नीड-बेस्ड नीति और किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली।
E20 ईंधन पर केंद्र को सिफारिश भेजने की तैयारी
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में E20 ईंधन को लेकर प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जिन वाहनों की तकनीक इस ईंधन के अनुरूप नहीं है, उनके लिए अलग विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित वाहन मालिकों को राहत देने की व्यवस्था भी बनाई जाए। इस संबंध में केंद्र सरकार को सिफारिश भेजने की बात भी कही गई।
विपक्ष ने ईंधन नीति और उद्योगों पर मांगा जवाब
विपक्षी सदस्यों ने सरकार से पूछा कि E20 नीति लागू होने से पंजाब को अब तक कितना लाभ मिला है। उन्होंने राज्य में एथेनॉल उद्योग, निवेश, किसानों की आय और आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी। साथ ही पेट्रोल की कीमतों और राज्य की कर नीति को लेकर भी सवाल उठाए गए।
सरकार ने गिनाए किसानों के लिए संभावित फायदे
सरकार की ओर से कहा गया कि एथेनॉल आधारित ईंधन नीति किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेगी। इससे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी और उद्योगों को भी फायदा मिलेगा। मंत्रियों ने कहा कि एथेनॉल का उपयोग ऊर्जा क्षेत्र के अलावा औषधि और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।
भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी किसी प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिली, वहां तत्काल कार्रवाई की गई और दोषियों को बख्शा नहीं गया।
महंगाई भत्ते और कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कर्मचारियों के लंबित डीए का मुद्दा उठाते हुए सरकार से स्पष्ट निर्णय बताने की मांग की। उन्होंने नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों का मामला भी उठाया और कहा कि सरकार को अपने वादों पर समयबद्ध फैसला लेना चाहिए।
बंदी सिखों और सांसद के मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग
अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस संबंध में स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग की। उन्होंने सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया और कहा कि लंबित मामलों पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
बाढ़ सुरक्षा और अधूरे विकास कार्यों पर उठे सवाल
विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अधूरी विकास परियोजनाओं और बाढ़ सुरक्षा कार्यों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं का शिलान्यास होने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। साथ ही पूर्व में हुए कार्यों और खर्च की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की गई।
नीड-बेस्ड नीति पर विपक्ष ने जताई नाराजगी
मोहाली से विधायक कुलवंत सिंह ने नीड-बेस्ड नीति के लंबित मामलों को जल्द निपटाने की मांग की। सरकार ने बताया कि मामले पर विचार चल रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे पर्याप्त जवाब नहीं माना और जल्द निर्णय लेने पर जोर दिया।
जंगली सूअरों से किसानों की परेशानी भी बनी चर्चा का विषय
ग्रामीण इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली सूअरों की समस्या भी सदन में उठी। सरकार ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए विभाग आवश्यक कदम उठा रहा है और किसानों को राहत देने के प्रयास जारी हैं।
तीखी बहस के साथ दिनभर चली कार्यवाही
दिनभर चली कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। विभिन्न मुद्दों पर सरकार ने अपना पक्ष रखा, जबकि विपक्ष ने जनहित और प्रशासनिक मामलों को लेकर लगातार जवाब मांगे। E20 ईंधन नीति से लेकर कर्मचारियों और किसानों के मुद्दों तक सदन में व्यापक चर्चा हुई।



