सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
करीब तीन महीने से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम अंतरिम समझौते का मसौदा सामने आया है। दोनों देशों ने युद्ध जैसी स्थिति को रोकने और आगे बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह समझौता अभी अंतिम शांति संधि नहीं माना जा रहा, लेकिन इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
समझौते के तहत दोनों पक्षों ने सैन्य कार्रवाई रोकने, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने और सीधे संघर्ष से बचने पर सहमति जताई है। रिपोर्टों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों को सामान्य करने और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
इस प्रस्तावित समझौते का सबसे अहम हिस्सा 60 दिनों की बातचीत अवधि है। इस दौरान दोनों देश उन बड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिन पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी जैसे विषय शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार अमेरिका चरणबद्ध तरीके से आर्थिक राहत और कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। वहीं ईरान ने दोबारा यह भरोसा दिया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था पर आगे बातचीत के लिए तैयार रहेगा। साथ ही बंद पड़े वित्तीय और व्यापारिक रास्तों को भी धीरे-धीरे खोलने की चर्चा हुई है।
हालांकि इस समझौते को लेकर कई देशों और विश्लेषकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। आलोचकों का कहना है कि अभी कई संवेदनशील मुद्दे खुले हैं और अंतिम नतीजा अगले दौर की वार्ताओं पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर समर्थकों का मानना है कि यदि बातचीत सफल रहती है तो इससे वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।



