सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस राजकीय समारोह में बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान पहुंचे, लेकिन उनके बेटे मुजतबा खामेनेई का सार्वजनिक रूप से दिखाई न देना सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गया।
दुनिया के 100 से ज्यादा देशों की रही मौजूदगी
ईरान सरकार के मुताबिक अंतिम विदाई समारोह में 100 से अधिक देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजे। कई देशों की ओर से मंत्री स्तर के अधिकारी शामिल हुए, जबकि कुछ मित्र देशों ने विशेष दूतों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन बन गया।
मुजतबा की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
लंबे समय से उत्तराधिकारी की दौड़ में बताए जा रहे मुजतबा खामेनेई पूरे कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक मंच पर नजर नहीं आए। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि ईरानी प्रशासन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया।
भारत, रूस और चीन ने नहीं भेजे सर्वोच्च नेता
ईरान के करीबी सहयोगी माने जाने वाले भारत, रूस और चीन ने अपने राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख को अंतिम संस्कार में नहीं भेजा। तीनों देशों ने वरिष्ठ प्रतिनिधियों के जरिए संवेदना व्यक्त की और ईरान के साथ अपने राजनयिक संबंधों का संदेश दिया।
पश्चिमी देशों की सीमित भागीदारी
यूरोप और पश्चिमी देशों के अधिकांश शीर्ष नेता समारोह से दूर रहे। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और ईरान के साथ रिश्तों की स्थिति इसकी प्रमुख वजह रही।
तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था रही अभेद्य
समारोह को देखते हुए राजधानी तेहरान में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए। संवेदनशील इलाकों, सरकारी परिसरों और अंतिम संस्कार स्थल के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। आने-जाने वाले लोगों की सघन जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया।
उत्तराधिकार पर भी बढ़ी चर्चा
खामेनेई के निधन के बाद ईरान के अगले सर्वोच्च नेता को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान के सत्ता ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।



