सेंटर न्यूज एक्सप्रेस । देसराज भुट्टा
अमृतसर। बेअदबी कानून को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सीधे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब में हुई पेशी के दौरान साफ संदेश दिया गया कि धार्मिक मामलों से जुड़े कानून बनाते समय पंथ की भावनाओं, परंपराओं और संस्थागत मर्यादा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बैठक के दौरान कानून के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई गई और राज्य सरकार से कहा गया कि विवादित हिस्सों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएं। साथ ही कानून के अमल को फिलहाल रोककर सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने की बात भी सामने आई। सरकार को इस प्रक्रिया के लिए एक महीने का समय दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस घटनाक्रम का राजनीतिक असर भी दिखाई दिया। सरकार की ओर से सिख मंत्री और विधायकों ने अपना पक्ष रखा, जबकि यह बहस तेज हुई कि कानून बनने से पहले पर्याप्त चर्चा और सभी संबंधित पक्षों से संवाद हुआ था या नहीं।
पूरे मामले ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक संवेदनाओं से जुड़े विषयों में केवल विधानसभा की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि संवाद और सहमति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार संशोधन के रास्ते पर आगे बढ़ती है या विवाद और गहराता है।



