सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज भुट्टा
बरनाला में हड़ताली सफाई कर्मचारियों पर हुए पुलिसिया बल प्रयोग के विरोध में सोमवार को वाल्मीकि समाज द्वारा पुकारे गए ‘पंजाब बंद’ का राज्य के कई हिस्सों में गहरा प्रभाव देखने को मिला। 22 जुलाई को पक्की भर्ती और पेंशन बहाली की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद भड़का जनआक्रोश सड़कों पर साफ नजर आया। प्रशासन द्वारा संबंधित डीएसपी को निलंबित किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए। उनका स्पष्ट कहना है कि केवल निलंबन एक औपचारिकता है और जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं होती, संघर्ष जारी रहेगा।

जालंधर में दर्ज किया गया सबसे अधिक प्रभाव
पंजाब बंद का सबसे व्यापक असर जालंधर शहर में दर्ज किया गया, जहाँ प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र और मुख्य बाजार पूरी तरह बंद रहे। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एमजीएन, सेठ हुक्म चंद, इनोसेंट हार्ट्स और शिव ज्योति जैसे प्रमुख निजी स्कूलों ने छुट्टी घोषित कर कक्षाएं ऑनलाइन संचालित कीं।
स्थानीय बस स्टैंड से अंतरराज्यीय और अंतरजिल्ला बसों की आवाजाही प्रभावित होने से यात्रियों को भारी असुविधा हुई, हालांकि नेशनल और स्टेट हाईवे पर यातायात सामान्य बना रहा। वाल्मीकि चौक और पुडा कॉम्प्लेक्स से जुलूस निकालने के बाद प्रदर्शनकारियों ने दोपहर करीब 1:00 बजे प्रशासनिक अधिकारी SDM शुभी आंग्रा को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपकर धरना समाप्त किया।

अमृतसर में बढ़ा राजनीतिक तनाव
अमृतसर में सुबह स्थिति सामान्य रहने के बाद दोपहर 12 बजे के आसपास माहौल अचानक गर्मा गया। प्रदर्शनकारियों ने हालगेट बाजार पहुंचकर दुकानें बंद करवाईं, जबकि लॉरेंस रोड जैसे इलाके खुले रहे।
भंडारी पुल के पास प्रदर्शन कर रहे लोगों का गुस्सा सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के प्रति देखने को मिला, जहाँ उन्होंने पार्टी नेताओं के होर्डिंग्स और पोस्टर फाड़ दिए तथा उन पर डंडे चलाए। सड़कों पर निकले आम लोगों को प्रदर्शनकारियों द्वारा समझा-बुझाकर वापस भेज दिया गया।
अन्य शहरों की स्थिति
राज्य के बाकी हिस्सों में बंद का प्रभाव सीमित रहा। लुधियाना के नगर निगम (A ब्लॉक) में धरना-प्रदर्शन और बाइक रैली के कारण प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप रहा, लेकिन आम बाजार खुले रहे।
कपूरथला में मुख्य बाजार बंद रहे, हालांकि मेडिकल और आपातकालीन सेवाओं की दुकानें खुली रखी गईं। वहीं दूसरी ओर, पटियाला, बठिंडा और मोहाली जैसे शहरों में रोजमर्रा का जनजीवन और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होते रहे।
आंदोलन का कारण और मुख्य मांगें
यह विवाद 8 जुलाई से पक्की नौकरी और पुरानी पेंशन योजना की मांग को लेकर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शुरू हुआ था। 22 जुलाई को अदालती आदेशों के तहत पुलिस की मौजूदगी में कचरा हटाने की कोशिश के दौरान पुलिस और हड़ताली कर्मचारियों के बीच झड़प हो गई, जिसमें लाठीचार्ज के दौरान महिलाओं के साथ बदसलूकी के आरोप लगे।
वाल्मीकि समाज की मुख्य मांग है कि पूरे बरनाला कांड की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच कराई जाए और केवल निलंबन तक सीमित न रहकर बल प्रयोग करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज कर पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए।



