पर्यावरण रक्षक शिवरात्रि” मनाने की अपील, बेल वृक्षारोपण, प्लास्टिक-मुक्त मंदिर और पशु सेवा पर दिया जोर
CENTRE NEWS EXPRESS (14 FEBRUARY DESRAJ )
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं सर्व धर्म ख्वाजा मंदिर सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. सूफी राज जैन ने देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए इस वर्ष “पर्यावरण रक्षक शिवरात्रि” मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण प्रकृति में विद्यमान हैं; इसलिए प्रकृति की सेवा ही सच्ची शिव-पूजा है।
डॉ. जैन ने अपने संदेश में कहा कि जब हम भगवान शिव को पिता और माँ पार्वती को प्रकृति रूपी माता मानते हैं, तब यह सम्पूर्ण सृष्टि हमारा परिवार बन जाती है। ऐसे में सृष्टि को प्रदूषित करना शिव का अपमान है। उन्होंने कहा कि हमारी पूजा केवल शिवलिंग तक सीमित न रहकर धरती, जल, वायु और जीव-जंतुओं तक पहुँचना चाहिए।
प्रमुख अपीलें
- बेलपत्र के साथ बेल का पौधा भी लगाएँ
उन्होंने बताया कि शिव पुराण में बेल वृक्ष को शिव का स्वरूप माना गया है। श्रद्धालु इस बार केवल बेलपत्र चढ़ाने के बजाय “एक व्यक्ति-एक बेल पौधा” लगाने का संकल्प लें। - अभिषेक जल का सदुपयोग
शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल और दूध का प्रवाह पौधों, वृक्षों या खुले मैदान की मिट्टी में किया जाए। मंदिरों में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि अभिषेक का जल सीधे पौधों या हरित क्षेत्र तक पहुँचे, जिससे जल संरक्षण और प्रकृति सेवा दोनों सुनिश्चित हो सकें। - प्लास्टिक-मुक्त शिवरात्रि
भगवान पशुपतिनाथ जीव-जंतुओं के रक्षक हैं। इसलिए मंदिर परिसरों में सिंगल-यूज प्लास्टिक का प्रयोग पूरी तरह बंद कर स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लें। - पशु सेवा भी शिव-भक्ति
सड़कों पर घूमते बेसहारा पशुओं को भोजन कराना भी महादेव की पूजा के समान है। जीवित ‘नंदी’ की सेवा ही सच्ची श्रद्धा है। - मन की स्वच्छता
उन्होंने कहा कि जैसे गंगा शिव की जटाओं से निर्मल बहती है, वैसे ही मन से नफरत और अहंकार दूर कर प्रेम, करुणा और सहअस्तित्व का भाव अपनाना ही वास्तविक आध्यात्मिक साधना है।
अंत में डॉ. सूफी राज जैन ने कहा कि महादेव आडंबरों से नहीं, बल्कि पर्यावरण और जीवों की रक्षा से प्रसन्न होते हैं। इस महाशिवरात्रि पर सभी लोग मिलकर एक स्वच्छ, हरित और प्रदूषण-मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लें।



