मालेरकोटला। पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक अभियान के दौरान मालेरकोटला में पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सामने आ गई। ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में मंच पर जाने को लेकर कांग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते मामला नारेबाजी और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।
जस्सी के मंच पर पहुंचने से शुरू हुआ विवाद
कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक जसवीर सिंह जस्सी मंच की ओर बढ़े। इसी दौरान पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना के समर्थकों ने उन्हें मंच पर जाने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में समर्थक भी आमने-सामने आ गए और कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारे
विवाद के दौरान दोनों गुटों के समर्थकों ने अपने नेताओं के पक्ष में नारेबाजी शुरू कर दी। खास बात यह रही कि पूरा घटनाक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की मौजूदगी में हुआ। स्थिति बिगड़ती देख वड़िंग खुद मंच से नीचे उतर आए और कार्यकर्ताओं को शांत कराने की कोशिश की।
मंच छोड़कर नीचे से किया संबोधन
हंगामा शांत नहीं होने पर राजा वड़िंग ने मंच के बजाय नीचे से ही कार्यकर्ताओं को संबोधित करना शुरू कर दिया। उन्होंने माहौल को संभालने और कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। घटना के कारण बैठक में पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई।
लगातार सामने आ रहे मतभेद
पंजाब कांग्रेस इन दिनों विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने के लिए बैठकें कर रही है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में पार्टी के कई कार्यक्रमों में नेताओं और समर्थकों के बीच मतभेद तथा नारेबाजी सामने आई है। इससे संगठन के भीतर चल रही खींचतान पर सवाल उठ रहे हैं।
हाईकमान तक पहुंचेगी रिपोर्ट
मालेरकोटला की घटना ऐसे समय सामने आई है जब पंजाब कांग्रेस के अंदर संगठनात्मक स्तर पर चल रहे विवादों को लेकर हाईकमान भी सक्रिय है। विभिन्न बैठकों में हुए घटनाक्रम की समीक्षा कर रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात सामने आई है। यह रिपोर्ट कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने रखी जानी है।
चुनावी तैयारी के बीच बढ़ी चिंता
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के लिए संगठन में एकजुटता बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सार्वजनिक कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं का आपस में भिड़ना पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकता है। मालेरकोटला की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले कांग्रेस अपने अंदरूनी मतभेदों को किस तरह सुलझाती है।



