Friday, February 20, 2026
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AI Summit: ‘एआई बहुत कुछ कर सकता है, लेकिन… दिल्ली के ट्रैफिक पर ब्रिटेन के पूर्व PM ऋषि सुनक ने कसा तंज

CENTRE NEWS EXPRESS (20 FEBRUARY DESRAJ)

ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इंपैक्ट समिट के कार्यक्रम में पहुंचने में देरी होने पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में दिल्ली के ट्रैफिक पर तंज कसा। उन्होंने मंच से कहा कि सेशन के लेट शुरू होने की जिम्मेदारी उनकी है और मजाकिया लहजे में जोड़ा “एआई बहुत सारी समस्याओं को कम कर सकता है, लेकिन दिल्ली का ट्रैफिक कम करना उसके लिए भी मुश्किल है।” उनकी इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी। सुनक का यह बयान दिल्ली के भारी ट्रैफिक की ओर इशारा करता है, जो अक्सर बड़े आयोजनों और व्यस्त समय में और बढ़ जाता है।

ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट में भारत की जमकर सराहना करते हुए कहा कि एआई ट्रांसफॉर्मेशन पर चर्चा के लिए भारत से बेहतर जगह कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से केवल विकसित देशों को ही नहीं, बल्कि विकासशील देशों को भी बड़ा लाभ मिलने वाला है। सुनक के मुताबिक, दुनिया को एक ऐसे नियमित फोरम की जरूरत है जहां तकनीक और एआई पर गंभीर चर्चा हो सके।

सुनक ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध हुआ है, जहां यह समझने का मौका मिल रहा है कि एआई किस तरह वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सकता है। उनके अनुसार, यह मंच विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और एआई के फायदे को व्यापक रूप से साझा करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ऋषि सुनक ने एआई इंपैक्ट समिट के इस सेशन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबके लिए होना चाहिए, और इसी उद्देश्य से इस मंच पर “एआई इंपैक्ट” पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने भारत की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने एआई की क्षमता को बहुत अच्छी तरह समझा है, इसलिए यहां इसे बड़े स्तर पर लागू करने की बात हो रही है। सुनक के अनुसार, एआई से आम जनता को वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए बड़ा टैलेंट पूल, मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सपोर्टिव टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की जरूरत होती है, और भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सुनक ने यह भी कहा कि एआई को लेकर दुनिया में अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। उनके मुताबिक, भारत में एआई को लेकर जबरदस्त आशावाद और भरोसा है, जबकि पश्चिमी देशों में फिलहाल चिंता ज्यादा दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि इस भरोसे के अंतर को पाटना केवल तकनीकी नहीं, बल्कि नीतिगत चुनौती भी है। अब एआई पर वैश्विक बहस तकनीक से आगे बढ़कर रणनीति पर केंद्रित हो गई है। सुनक के शब्दों में “मुद्दा अब यह नहीं है कि ये उपकरण क्या कर सकते हैं, बल्कि यह है कि देश इनके साथ क्या करना चुनते हैं।”
ViaCNE
SourceCNE
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