सेंटर न्यूज एक्सप्रेस। देसराज
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियों के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक बयान जबरदस्त चर्चा में है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘आस्क मी एनीथिंग’ (AMA) लाइव सेशन के दौरान Gen-Z युवाओं और छात्रों से बातचीत करते हुए जब राहुल से पूछा गया कि बीजेपी में उनका पसंदीदा नेता कौन है, तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया।
राहुल गांधी ने कहा— “कैप्टन अमरिंदर सिंह, डेफिनेटली। मेरी उनसे अच्छी बनती है। वह काफी कूल हैं और मिलिट्री हिस्ट्री के एक्सपर्ट हैं, इसलिए मैं उन्हें पसंद करता हूं। हेलो अंकल अमरिंदर…”
राहुल गांधी के इस बयान का वीडियो सामने आते ही पंजाब की राजनीति में कैप्टन की कांग्रेस में वापसी की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, इस पर कैप्टन अमरिंदर सिंह का बयान भी आया, जिसमें उन्होंने साफ किया कि राजनीति और पर्सनल लाइफ अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब बीजेपी में हैं और कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, कैप्टन ने यह भी माना कि वे कई बार कांग्रेस के पुराने पारिवारिक माहौल को मिस करते हैं।
इस बयान पर पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल जी, कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ करने में काफी देर हो चुकी है। जब उन्हें सीएम की कुर्सी से उतारा गया था, तभी उनकी सम्मानजनक विदाई होनी चाहिए थी।
कैप्टन के जाने से कांग्रेस को झेलना पड़ा भारी नुकसान
पंजाब चुनाव से ठीक 3 महीने पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटाने और चरणजीत सिंह चन्नी को कमान सौंपने का दांव कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हुआ था। 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस महज 18 सीटों पर सिमट गई थी। कैप्टन के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस का पारंपरिक जट्ट सिख वोट बैंक खिसक गया, जो राज्य की 80 से 85 सीटों पर जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
कैप्टन के हटने के बाद पंजाब कांग्रेस में नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के बीच खींचतान तेज हो गई, जिससे पार्टी का संगठन कमजोर हुआ। कैप्टन पंजाब के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल रहे हैं जिनकी हिंदू और सिख दोनों समुदायों में समान पकड़ थी। उनके जाने के बाद पार्टी के पास ऐसा कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं बचा।
अब राहुल गांधी द्वारा खुले तौर पर ‘अंकल अमरिंदर’ कहकर तारीफ किए जाने के बाद राजनीतिक जानकार इसे गांधी परिवार और पटियाला राजघराने के पुराने पारिवारिक रिश्तों के साथ-साथ पंजाब के आगामी चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं।



